Popular Posts

बुधवार, 24 अगस्त 2011

प्रख्यात रामस्नेही संत स्वामी रामनिवास महाराज


गौ और राम की सेवा ही था जिनका जीवन लक्ष्य
लाडनूं में न मिली दो गज जमीन
गौशाला के दायित्व को लेकर लोगों में रोष

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। प्रख्यात रामस्नेही सम्प्रदाय के संत स्वामी रामनिवास महाराज को लाडनूं क्षेत्र में दो गज जमीन तक नहीं मिलने को लेकर लोगों में गहरा रोष देखा गया।
लाडनूं के दो संतो की साम्यता- तुलसी व रामनिवास

लाडनूं में दो संत विख्यात थे, एक तो आचार्य तुलसी व दूसरे स्वामी रामनिवास। दोनों विपरीत धाराओं- ब्राह्मण संस्कृति व श्रमण संस्कृति से सम्बद्ध थे। इसके बावजूद इन दोनों में जो समानता थी वो यह कि ये लाडनूं के प्रति असीम भावनात्मक आकर्षण रखते थे। आचार्य तुलसी ने पारमार्थिक शिक्षण संस्थान, वृद्ध साध्वी सेवा ककेन्द्र व जैन विश्व भारती एवं जैविभा विश्वविद्यालय जैसे अवदान लाडनूं के लिए दिए एवं अपनी भावना के अनुरूप अन्ततोगत्वा लाडनूं को उनके जन्म शताब्दी वर्ष से पूर्व तेरापंथ धर्मसंघ की राजधानी घोषित कर दिया गया। इसी प्रकार स्वामी रामनिवास ने लाडनूं में श्री राम आनन्द गौशाला के लिए लगभग अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उन्होंने गौशाला के लिए अनेक लड़ाइयां लड़ी, सरकार से अनुदान स्वीकृत करवाना हो या सम्पति का संरक्षण, वहां धर्मशाला बनवाकर गौशाला की आमदनी बढानी हो, पशु चिकित्सालय खुलवाकर पशुओं के हित में कार्य करना हो या दानदाताओं से मुक्त हस्त सहयोग जुटाना, सभी के लिए स्वामी रामनिवास हरपल तैयार रहते थे। गौशाला के माध्यम से लागों को शुद्ध दूध-घी उपलब्ध करवाने के कार्य को उन्होंने सफलता पूर्वक करवाया वहीं अकाल के समय समूचे क्षेत्र के पशुधन के लिए चारा उपलब्ध करवाने में भी उनका कार्य महत्वपूर्ण रहा।
दोनों ने किए अपने उत्तराधिकारी घोषित
आचार्य तुलसी ने अपने जीवन काल में केवल एक नहीं दो पीढी के उत्तराधिकारी घोषित कर दिए। उन्होंने अपने जीवन काल में ही मुनि नथमल को युवाचार्य महाप्रज्ञ बना डाला और आगे कोई उत्तराधिकार की लड़ाई न छिड़े इस सोच के कारण उन्होंने स्वयं आचार्य पद त्याग कर महाप्रज्ञ को आचार्य पद पर पदारूढ कर दिया तथा मुनि मर्यादा कुमार को युवाचार्य महाश्रमण के रूप में घोषित करवा दिया। वे स्वयं एक नए पद गणाधिपति के रूप में कहे जाने लगे और गुरूदेव के रूप में ख्यात हुए। स्वामी रामनिवास ने ग्राम दुजार में बने आर्यसमाजी संन्यासी संत ओमप्रकाश उर्फ स्वामी पूर्णानन्द के साधु आश्रम को अपने कब्जे में लेकर उसे रामस्नेही सम्प्रदाय का आश्रम बना डाला और उनके देवलोक गमन के पश्चात उनके स्थान पर शिष्य के रूप में ज्ञानाराम महाराज की नियुक्ति स्वामी रामनिवास ने की तथा इसी प्रकार अपने शिष्य व गद्दीपति के रूप में रामद्वारा की बागडोर अपने जीवन काल में ही स्वामी अमृत राम को सुपुर्द कर दी।
नसीब नहीं हुई लाडनूं की धरा?
इन दोनों संतों में आचार्य तुलसी लाडनूं के जाए-जन्मे थे और लाडनूं में बड़े हुए, जबकि स्वामी रामनिवास का जन्म तो अवश्य पंजाब में हुआ, परन्तु उनका बचपन लाडनूं में ही बीता और यहीं पले-बढे। इन दोनों में समानता यह रही कि दोनों की ही समाधियाां लाडनूं को नसीब नहीं हुई। आचार्य तुलसी का देहावसान गंगाशहर में हुआ, उनके अंतिम संस्कार लाडनूं में करने की चेष्टाएं हुई, परन्तु गंगाशहर के लोगों को यह मंजूर नहीं था, सो उनका समाधि स्थल बना गंगाशहर। और स्वामी रामनिवास का देवलोक गमन तो अवश्य लाडनूं में हुआ, परन्तु उनका समाधि स्थल बना ऋषिकेश। लाडनूं के लोगों को बेमन से उनकी पार्थिव देह को ऋषिकेश भिजवाना पड़ा, यह मात्र श्रीराम आनन्द गौशाला के कारण हुआ। 13 अगस्त 2011 श्रावण शुक्ला पूर्णिमा शनिवार के रोज शाम 7.15 बजे स्वामी रामनिवास महाराज अपने रामद्वारा में ब्रह्मलीन हो गए। उनके ब्रह्मलीन होने के पश्चात लोगों का भारी हुजूम यहां राहूगेट स्थित रामद्वारा की ओर उमड़ पड़ा। लोगों ने उनके उतराधिकारी स्वामी अमृतराम महाराज के समक्ष आग्रह किया कि देवलोकगामी स्वामी रामनिवास का अंतिम संस्कार लाडनूं में ही किया जावे। देर रात्रि तक इसके लिए काफी अनुनय-विनय का दौर चला, जिस पर स्वामी अमृतराम ने बताया कि स्वामी रामनिवास की इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार राम आनन्द गौशाला में अथवा फिर ऋषिकेश में गंगा तट पर किया जावे। उनके अन्तिम संस्कार के स्थान को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में देर रात तक चली जद्दोजहद के पश्चात रात्रि 1.15 बजे उनकी पार्थिव देह को एम्बुलेंस से ऋषिकेश में गंगा तट पर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। गौशाला के पदाधिकारियों पर आम लोगों द्वारा भारी दबाव डाला जाने के बावजूद उन्होंने इसके लिए अनुमति प्रदान नहीं की, भागचंद बरडिय़ा आदि कई लोगों ने अपनी निजी भूमि इसके लिए गौशाला को उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव भी रखा परन्तु गौशाला के पदाधिकारी टस से मस नहीं हुए। जिसके बाद उनकी पार्थिव देह को ऋषिकेश के लिए ले जाया गया। लाडनूं में उनके शरीर के लिए अंत्येष्टि की भूमि तक उपलब्ध नहीं करवाने को लेकर स्थानीय लोगों में गौशाला के प्रति गहरा आक्रोश देखा गया।
कहां थे इनके वास्तविक श्मशान?
लाडनूं में रामस्नेही सम्प्रदाय के दो रामद्वारा हैं, एक आधी पट्टी में जो बड़ा रामद्वारा कहा जाता है और दूसरा राहूगेट के अन्दर है, जिसे रामद्वारा सत्संग भवन कहा जाता है। इस सत्संग भवन रामद्वारा में सूरदास संत मेवाराम कभी महन्त के रूप में विराजित थे, जिनके चेले स्वामी रामनिवास थे। स्वामी रामनिवास ने गद्दी पर विराजित होने के बाद अपने साधुओं का समाधि-स्थल आनन्द कुटिया, जो तुलसीदास जी के चबूतरे के सामने स्थित थी, को एक व्यापारी के हाथों बेच डाला। अब वहां एक शोरूम है।इस कुटिया में समाधि, पगल्या, शिवलिंग, तुलसी का पौधा आदि थे, जो नष्ट कर दिए गए। ऐसे में श्मशान स्थल की समस्या आनी ही थी।

शुक्रवार, 10 जून 2011

जिला शिक्षक संघ के बने लालाराम वरिष्ठ उपाध्यक्ष--- फिर बने अर्जुनराम अध्यक्ष व किस्तूरमल मंत्री

नागौर (कलम कला न्यूज)। राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के जिला स्तरीय चुनावों में संरक्षक सम्पतलाल स्वामी, सभाध्यक्ष मोहनलाल कड़वासरा जाणेदा, अध्यक्ष अर्जुनराम लोमरोड नागौर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष लालाराम बिडियासर मंगलपुरा लाडनूं, उपाध्यक्ष शहरी नैन मोहम्मद जाटावास, उपाध्यक्ष ग्रामीण विजय कुमार डूकिया पालोट डीडवाना, मंत्री किस्तूरमल वर्मा, महिला मंत्री श्रीमती कान्ता पाराशर जायल, कोषाध्यक्ष रामनिवास देडू फिड़ौद, संगठन मंत्री नरसिंह पिण्डेल फिड़ौद, संयुक्त मंत्री सोहनलाल कटारिया रेगरों की ढाणी, प्रचार मंत्री सुखराम चौधरी केरिया माकड़ा, कार्यालय मंत्री जमील अहमद अंसारी, संगठन मंत्री भीवाराम भाकर मोडियावट डीडवाना, संगठन मंत्री मुक्ताराम मामड़ोली, संगठन मंत्री शहरी रामकिशोर कमेडिय़ा भूरियासणी, संयोजक संघर्ष समिति बहादुरराम खिलेरी, सी.सै. प्रतिनिधि कैलाश चंद काकड़, सैकेंडरी प्रतिनिधि मेघाराम बुगालिया बांसा डीडवाना, उ.प्रा.वि. प्रतिनिधि भूराराम रायका चांदनी, प्रा.वि. प्रतिनिधि शहरी राजेन्द्रसिंह राठौड़, प्रा.वि.प्रतिनिधि ग्रामीण दुर्गाराम गोदारा बड़ी खाटू, संस्कृत प्रतिनिधि सहदेव मंडा ढींगसरी लाडनूं, उर्दू प्रतिनिधि हबीब खां धोलिया लाडनूं, निजी विद्यालय प्रतिनिधि हनुमानराम सारण खिंयाला, शारीरिक शिक्षक प्रतिनिधि ज्ञानाराम महला ध्यावा लाडनूं, प्रबोधक प्रतिनिधि अनवर अली, पंचायत राज प्रतिनिधि सोहनराम आंवला बोरावड़ को चयनित घोषित किया गया। चुनाव अधिकारी मजहर हुसैन व पर्यवेक्षक मो. सद्दीक चेनार की देखरेख में सम्पन्न हुए।

पार्षदों ने बताई पालिका में गड़बडिय़ां-- डीडीआर को सौंपा ज्ञापन

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। अजमेर से निरीक्षण के लिए आए क्षेत्रीय उपनिदेशक राजपालसिंह चौहान ने स्थानीय पालिका में गड़बडिय़ों का भंडार पाया, उन्होंने करीब पांच दर्जन अनियमितताओं को जांच-बिन्दुओं के रूप में दर्ज किया तथा नगरपालिका से गृहकर, भवन-निर्माण, विकास व ठेकों से सम्बंधित पऋावलियों को अपने कब्जे में जांच के लिए लिया तथा उन्हें लेकर जयपुर गए। उन्हें इस अवसर पर अलग-अलग व्यक्तियों ने मिलकर अनेक ज्ञापन सौंपे और नगरपालिका से सम्बंधित अनियमितताओं के बारे में उन्हें अवगत कराया। डीडीआर को पत्रकार लक्ष्मणसिंह चारण व अरिहन्त भंसाली ने करीब एक साल से विज्ञापनों का बकाया भुगतान नहीं देने व विज्ञापन जारी करने में की जा रही धांधली किे बारे में बताया। पीसीसी के पूर्व सदस्य एडवोकेट जगदीश सिंह ने उन्हें अन्य विभिन्न अनियमितताओं व धांधलियों की जानकारी दी। सजग नागरिक मोर्चा के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार जगदीश यायावर ने उन्हें नगरपालिका के स्वामित्व की कब्जा हो चुकी करोड़ों की भूमि के बारे में बताया। सामाजिक कार्यकर्ता महेश सांखला ने नेहरू पार्क और जैन विश्व भारती के भूमि घोटाले के बारे में उन्हें विस्तार से सप्रमाण जानकारी दी। कांग्रेस अभाव अभियोग प्रकोष्ठके जिला उपाध्यक्ष मुश्ताक खां हाथीखानी आदि ने उन्हें काफी जानकारियां दी।
नगरपालिका के उपाध्यक्ष याकूब शेख के नेतृत्व में करीब एक दर्जन पार्षदों ने यहां स्थानीय निकाय के क्षेत्रीय उपनिदेशक राजपाल सिंह से मुलाकात करके उन्हें नगर पालिका में पार्षदों के सम्मान की बजाए अपमान होने की जानकारी दी तथा बताया कि उन्हें अपमानित करने के लिए मानदेय भुगतान को जानबूझकर रोका जा रहा है, उनके द्वारा लिए गए प्रस्तावों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती और मनमर्जी से काम किए जाते हैं। अनेक कार्यों के बारे में तो पार्षदों की राय ली जानी तक उचित नहीं समझी जाती। पार्षदों की ओर से एक लिखित ज्ञापन भी उन्हें सौंपा गया, जिस पर उपाध्यक्ष याकूब शेख, जीवन मल बडज़ात्या, जगदीश प्रसाद दोलावत, फैजूखां, हनुमानमल जोशी, अदरीश खां आदि ने हस्ताक्षर किए। ज्ञापन में युवक परिषद के पास से पहली पट्टी से पांचवीं पट्टी तक सड़क मरम्मत कार्य व स्टेशन रोड का युवक परिषद के एग्रीमेंट के बावजूद सड़क का पुनर्निर्माण, बड़ाबास में जसवंतगढ टंकी के पास नाला बनते-बनते ही टूट जाने, 30 लाख के रिकार्पेट व पेच वर्क का ठेका दिए जाने में की गई धांधली, समितियों के गठन से लेकर अब तक की जा रही मनमर्जी, शहर की बिगड़ी हुई सफाई व्यवस्था और सार्वजनिक रोशनी व्यवस्था की बिगड़ी हालत की ओर मुख्य रूप से ध्यान आकर्षित किया गया है। उपाध्यक्ष शेख के साथ माणक चंद लोहिया, सलीम पंवार आदि भी मौजूद थे। भाजपा के शहर अध्यक्ष व पूर्व पार्षद मुरलीधर सोनी भी पार्षदों के साथ मौजूद थे।

पार्षदों के अधिकारों पर प्रहार: सदस्यों को विश्वास में लिए बिना लाखों का मनमाना खर्च

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। नगरपालिका के सामने से होते हुए स्टेशन तक जाने वाली सीमेंट सड़क का निर्माण युवक परिषद द्वारा किया गया था, जो काफी मजबूत था, पर उसे तोड़कर दुबारा बनाए जाने की शिकायत हो जाने पर जगह-जगह से छोड़ कर उसको इस तरह से बनाया गया है कि देखने में वह मरम्मत कार्य लगे। यह कहना है मुस्लिम महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस अभाव अभियोग प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष मो. मुश्ताक खां हाथीखानी का, जिन्होंनेे जिला कलेक्टर सहित सभी अधिकारियों को पत्र लिखकर बताया है कि लाडनूं नगर पालिका को करीब 16 लाख की राशि वर्षा से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए प्राप्त हुए, जिनका खुला दुरूपयोग किया जा रहा है। हाथीखानी ने अपने पत्र में कार्यवाही की मांग करते हुए बताया है कि 16 लाख से अधिक की इस राशि को खर्च करने के लिए नगरपालिका के 30 पार्षदों में से किसी की भी राय नहीं ली गई और पार्षदों व जन-भावना की खुली अनदेखी की जाकर शहर की सभी क्षतिग्रस्त सड़कों को ठीक करवाने के बजाए सबसे मजबूत सड़क स्टेशन रोड को तुड़वाया जाकर वापस बनवाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने लिखा है कि यह सड़क नगर की एक संस्था युवक परिषद द्वारा नगरपालिका से 10 वर्षों तक पूर्ण रखरखाव व मरम्मत की शर्तों पर निर्मित करवाई गई थी, जिसकी मियाद अभी तक पूर्ण नहीं हो पाई है। इसके बावजूद उसकी मरम्मत के सम्बंध में जिम्मेदार संस्था को लिखित सूचना दिए जाने के बजाये नगर के लिए प्राप्त राशि का खुला दुरूपयोग किया गया है, जिससें सभी पार्षदों में रोष है तथा समाचार पत्रों में भी इस सम्बंध में प्रकाशन हुआ है। लगभग सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर पल्ला झाडऩे का आरोप लगाते हुए लिखा है कि वे एक दूसरे को जिम्मेदार बताने पर तुले हुए हैं। सहायक अभियंता मंगलाराम कहते हैं कि उन्होंने पालिकाध्यक्ष बच्छराज नाहटा व अधिशाषी अधिकारी जस्साराम गोदारा के कहने पर यह कार्य शुरू किया है। अधिशाषी अधिकारी जस्साराम गोदारा का कहना है कि उनको इस मरम्मत या निर्माण कार्य के आदेश के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस प्रकार सब अपनी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। ऐसा लगता है कि इसमें भारी घोटाला किया गया है, जिसके कारण ये अधिकारी इस तरह के बयान देने में लगे हैं। मुश्ताकखां के अनुसार यह निश्चित है कि कार्यादेश के बिना कोई भी कार्य ठेकेदार करता नहीं और अभियंता करवाता नहीं, तब इस मामले में किसने कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) दिया? क्या इसे किसी इशारे पर बिना वर्क-ऑर्डर ही शुरू कर दिया गया। अगर ऐसा किए जाने के कारण ही ये सभी इस प्रकार बयान देकर अपने बचाव की कोशिश कर रहे हैं तो यह काफी गंभीर मामला है तथा इसकी व्यापक व निष्पक्ष जांच की जाना आवश्यक बताई, साथ ही इस बात की पूरी संभावना बताई कि मिलीभगत पूर्वक गुपचुप में ही इसका भगुतान भी किया जाएगा, अत: तुरन्त इस कार्य का भुगतान रूकवाकर किसी लाडनूं से बाहर के उच्च अधिकारी से मामले की जांच करवाने की मांग की गई है।
अवैध निर्माण और मिलीभगत
मुश्ताक हाथीखानी ने अजमेर से यहां पालिका का निरीक्षण करने आए स्थानीय निकाय विभाग के क्षेत्रीय उपनिदेशक राजपाल सिंह चौहान को भी एक ज्ञापन सौंप कर आधी पीडब्लूडी की रोड का मरम्मत के नाम पर घोटाला किए जाने और युवक परिषद के बजाए स्वयं निर्मित करवाए जाने के बारे में समस्त जानकारी दी तथा यह भी बताया कि लाडनूं शहर में बड़ी तादाद में अवैध निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं। मिलीभगत का आलम यह है कि गत 29 अप्रेल की बैठक में रखी गई निर्माण पत्रावलियों में से अधिकांश में निर्माण किया जा चुका, जिससे उन पर पार्षदों ने आपति जताते हुए पूरी रिपोर्ट लेकर आगामी बैठक में रखे जाने का प्रस्ताव लिया गया, इसके बावजूद अधिकारीगण इन पत्रावलियों पर जुर्माना वसूली के बजाए इजाजतें देने पर आमादा हैं। डीडीआर ने उनकी शिकायत पर मौका देखा और सम्बंधित पत्रावलियों को जांच के लिए वे अपने साथ ले गए।

लाडनूं के साथ भारी भेदभाव---सांसद मिर्धा से जिले के कांग्रेसी असंतुष्ट

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। नागौर क्षेत्र से विजयी रही सांसद ज्योति मिर्धा ने जिले के विकास के लिए मिलने वाली सांसद निधि का उपयोग शही क्षेत्रों के लिए तो बिलकुल ही नहीं किया है, वहीं लाडनूं विधान सभा क्षेत्र में तो उन्होंने कोई धन खर्च करना संभवत: उचित ही नहीं समझा।
जिला परिषद के ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ के सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अन्तर्गत ज्योति मिर्धा ने 2010-11 में डीडवाना पंचायत समिति के अधीन सबसे ज्यादा काम दिए, जहां कुल 63.77 लाख के कार्य दिए गए। मकराना व नागौर में मिलाकर कुल 90 लाख, जायल में 47 लाख व परबतसर में 39 लाख के काम दिए गए। शेष क्षेत्रों के लिए नगण्य काम मंजूर हुए, जिनमें लाडनूं को सबसे उपेक्षित रखा गया। लाडनूं के दो गांवों में सिर्फ एक लाख की राशि कोठे बनाने के लिए दी गई। इनमें मालगांव में रताऊ के रास्ते पर कोठा बनाने व ग्राम झरडिय़ा में टोकी रास्ते पर बिडियासरों की ढाणी में एक कोठा बनाने के कार्य के लिए मात्र 50-50 हजार की राशि इनायत की गई। लाडनूं नगरपालिका क्षेत्र में तो एक पैसा तक खर्च किया जाना उचित नहीं समझा गया। इसी प्रकार कुचामन, नावां, मकराना आदि शहरों की भी उपेक्षा की गई है। कांग्रेस अभाव अभियोग प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष मो. मुश्ताक खां हाथीखानी ने बताया कि सांसद ज्योति मिर्धा की कार्यशैली के कारण पूरे जिले में मतदाताओं में गहरी नाराजगी पैदा हुई है तथा कार्यकर्ताओं के साथ भेदभाव बरतने की उनकी नीति के कारण आगामी लोकसभा व विधान सभा चुनावों में इसका खामियाजा कांग्रेस पार्टी को उठाना पड़ सकता है। उन्होंने लाडनूं के साथ पक्षपातपूर्ण रवैये की भत्र्सना करते हुए कहा कि विकास में राजनीति को घुसेडऩा सरासर अनुचित है।

सैंकड़ों बीघा जमीन खुर्दबुर्दनगरपालिका की सवा सौ बीघा भूमि पर अवैध निर्माण: रूपान्तरण, नियमन व निर्माण इजाजत के करोड़ों हड़पे: सारे अधिकारी कर रहे हैं लीपापोती:आखिर जांच और तथ्य सामने आने के बावजूद प्रशासन निष्क्रिय क्यों?

लाडनूं (खुफिया कलम)। लाडनूं शहर बुरी तरह भू माफियाओं के चंगुल में फंस चुका है। कीमती जमीनों को हथियाने के लिए तरह-तरह की चालों को अख्तियार करना और गिरोहबद्ध होकर अपनी कार्रगुजारियों को अंजाम देना, ये भू माफिया भलीभंति जानते हैं। मजे की बात तो यह है कि क्षेत्र का समूचा प्रशासन भी इनके कारनामों में कहीं न कहीं भागीदार अवश्य हैं। तालाबों, पायतनों, चारागाहों और सरकारी गैरमुमकिन अगोर की भूमियों पर अंधाधुंध कब्जे हो रहे हैं, मगर कोई भी बोलने और सुनने वाला नहीं है। और तो और जब यह जानकारी सामने आई कि सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह आदि बातों का ढोल पीटने वाले भी इन गलत कुकर्मों से वंचित नहीं है, तो लोगों को घोर आश्चर्य होना स्वाभाविक है।
राहुल जैन नामक एक किसी नागरिक ने इस सम्बंध में आवाज उठाई, जिससे राज्यपाल से लेकर जिला प्रशासन तक सक्रिय हुए और कार्रवाई शुरू हुई, परन्तु यह अति दु:खद पहलु है कि स्थानीय प्रशासन पूरी तरह इस मामले में लीपापोती करने में जुटा है।
महेश सांखला नामक एक समाजसेवी व्यक्ति ने जब मुखर होकर इस सम्बंध में सूचना के अधिकार का सहारा लिया तो उसे पूरी तरह भ्रमित करने वाली और गलत जानकारियां दी गई और कुछ मामलों में तो कोई जानकारी देने से इंकार तक अवैधानिक तौर पर कर दिया गया।
राज्यपाल सचिवालय से शुरू हुई कार्रवाई
जिला कलेक्टर नागौर ने उपखंड अधिकारी लाडनूं को एक पत्र सं. 2412 दिनांक 16.9.2008 भेजकर लिखा जैन विश्व भारती एवं जैन विश्व भारती मान्य विश्व विद्यालय द्वारा मनचाहे ढंग से की जा रही नियम विरूद्ध गतिविधियों पर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी। इस पत्र में बताया गया कि राज्यपाल सचिवालय से प्राप्त शिकायत के आधार पर एक टीम गठित कर वस्तुस्थिति की जांच बिन्दुवार कर स्वयं के निरीक्षण में तैयार करवाकर शिकायत के बिन्दुवार रिपोर्ट एक सप्ताह में भिजवायी जावे। यह आदेश कलेक्टर ने शासन उप सचिव जन अभाव अभियोग निराकरण विभाग के पत्र क्र. प. 2(25) आरपीजी/पब /बी /2008 दिनांक 15.9.2008 एवं दूरभाष के निर्देशों के आधार पर दिए।
13 खसरों की सवा सौ बीघा जमीन नगरपालिका की
इसके जवाब में तत्कालीन उपखंड अधिकारी अजीत सिंह राजावत ने अपने पत्र सं. सीएम/रीडर/08/42 दिनांक 03.10.2008 में बताया है कि जैन विश्व भारती के भीतर खसरा नं. 497 रकबा 19 बीघा 05 बिस्वा, ख.नं. 507 रकबा 5 बीघा 6 बिस्वा, ख.नं. 510 रकबा 6 बीघा 09 बिस्वा, ख.नं. 511 रकबा 6 बीघा 14 बिस्वा, ख.नं. 512 रकबा 3 बीघा 01 बिस्वा, ख.नं. 513 रकबा 14 बिस्वा, ख.नं. 514 रकबा 13 बीघा 04 बिस्वा, ख.नं. 515 रकबा 5 बीघा 19 बिस्वा, ख.नं. 516 रकबा 9 बीघा 9 बिस्वा, ख.नं. 517 रकबा 19 बीघा 06 बिस्वा, ख.नं. 509 रकबा 8 बीघा 12 बिस्वा, ख.नं. 495/2247 रकबा 13 बीघा 13 बिस्वा- इन सभी कुल 12 खसराओं की करब सवा सौ बीघा भूमि राजस्व रेकर्ड के मुताबिक नगरपालिका लाडनूं के नाम से नामांकन सं. 2220 दिनांक 30.07.2001 द्वारा अंकित है। इसके अलावा खसरा नं. 504 रकबा 13 बीघा 10 बिस्वा की आधी भूमि नगरपालिका और आधी भूमि जैन विश्व भारती के नाम से दर्ज है और जैन विश्व भारती मान्य विश्व विद्यालय के नाम से मात्र खसरा नं. 508 रकबा 13 बिस्वा भूमि ही दर्ज है।
अनेक अन्य खातेदारों की भूमि पर भी कब्जा
इन संस्थाओं ने कुछ अन्य खातेदारों की भूमि खसरा नं. 496, 506, 507, व 508 पर भी अवैध कब्जा कर रखा है। अलग-अलग खसराओं पर निर्मित किए गए भवनों का वर्णन भी इस रिपोर्ट में दिया गया है। इस भूमि के नगरपालिका लाडनूं में निहित होने, संस्थान द्वारा भूमि का रूपांतरण नहीं कराए जाने, निर्माण कार्यों के लिए स्थानीय निकाय से कोई स्वीकृति नहीं ली जाने की जानकारी देते हुए इसके लिए स्थानीय नगरपालिका को कार्यवाही के लिए उत्तरदायी ठहराया था।

नेहरू पार्क को अतिक्रमण से मुक्त करवाने की मांग

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता महेशप्रकाश सांखला ने तहसीलदार सत्यनारायण शर्मा व अधिशाषी अधिकारी जस्साराम गोदारा को पत्र लिखकर जिला कलेक्टर के आदेशों की पालना करने तथा अपनी कार्यवाही पूर्ण कर शीघ्र रिपोर्ट भिजवाने बाबत मांग की है। सांखला ने अपने पत्र में लिखा है कि राजकीय भूमि व सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण कर अनधिकृत रूप से निर्मित धार्मिक पूजास्थलों के सम्बंध में राज्य सरकार द्वारा जारी नीति के अनुसार तुरन्त कार्यवाही की जावे। इस सम्बंध में बताया गया है कि राजस्थान उच्च न्यायालय की एसबी सिविल रिट पिटीशन सं. 2145/2010 एवं उच्चतम न्यायालय की विशेष अनुमति अपील (दीवानी) सं. 8519/2006 में अन्तरिम आदेश दिनांक 29-09-09 की पालना में उन्हें निर्देशित किया गया है, इसके बावजूद प्रकरण में कार्यवाही लम्बित रखी जा रही है। सांखला ने जिला कलेक्टर के पत्र क्रमांक- एफ.12()राजस्व/2010/3880-3888 दिनांक- 19-05-11, क्र. 11878-11897 दिनांक-01-12- 2010, क्र. 13754-13773 दिनांक- 30-12-2010, क्र. 2338-2357 दिनांक- 29-03-2011 एवं क्र. न्याय/2010/9616-46 दिनांक- 10-11-2010 व क्र. 09/6864 दिनांक-28-10-09 का अपने पत्र में हवाला दिया है, जिनकी स्थानीय अधिकारियों द्वारा कोई पालना नहीं की जा रही है।
सांखला ने मांग की है कि नेहरू पार्क परिसर, लाडनूं को अतिक्रमण से मुक्त करावें। आवंटित भूमि खसरा नं. 497 सरहद लाडनूं को जिला कलेक्टर नागौर द्वारा पत्र क्रं. राजस्व राजस्व/86/903 दिनांक- 03-03-1986 द्वारा 30 वर्षों की लीज पर निशुल्क आवंटित किया गया था, परन्तु इसमें लीज शर्तों व नियमों का उल्लंघन किया गया है। यहां निर्मित भवनों के लिए स्थानीय निकायों से निर्माण सम्बंधी आवश्यक स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई और न कृषि भूमि के रूपान्तरण की कार्यवाही ही की गई। सांखला ने इस सम्बंध में उपखण्ड अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक- सीएम/रीडर/08/42 दिनांक- 03-10-2008, क्र. सीएम/रीडर/08/1623 दिनांक- 04-11-2008, क्र. राज्यपाल सचिवालय/08/1781 व 1782 दिनांक- 16-10-2008 के सम्बंध में कार्यवाही नहीं की जाना बताते हुए तुरन्त कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने तहसीलदार कार्यालय से जारी पत्रांक- भू.अ./2011/11/768 दिनांक- 07-04-2011 मेंसंलग्र की गई अतिक्रमियों की सूची के अनुसार अतिक्रमणों को हटाने व समस्त अनधिकृत रूप से बने मकानों को सरकारी तहबील में लेने की मांग भी की है।
इस सम्बंध में अनावश्यक विलम्ब करने, सभा-संस्थाओं के प्रभाव में आकर कत्र्तव्यनिष्ठा में विफल रहने, अपूर्ण सूचनाओं को अग्रेषित करने, रिकार्ड व पत्रावलियों को बिना देखे ही सूचनाएं भिजवाई जाने को गम्भीर व लापरवाही मानते हुए उच्चाधिकारियों व न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने की चेतावनी भी दी है।

mission kuldevi: Members in Rajasthan

mission kuldevi: Members in Rajasthan

शनिवार, 28 मई 2011

नेहरू पार्क को अतिक्रमण से मुक्त करवाने की मांग

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता महेशप्रकाश सांखला ने तहसीलदार सत्यनारायण शर्मा व अधिशाषी अधिकारी जस्साराम गोदारा को पत्र लिखकर जिला कलेक्टर के आदेशों की पालना करने तथा अपनी कार्यवाही पूर्ण कर शीघ्र रिपोर्ट भिजवाने बाबत मांग की है। सांखला ने अपने पत्र में लिखा है कि राजकीय भूमि व सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण कर अनधिकृत रूप से निर्मित धार्मिक पूजास्थलों के सम्बंध में राज्य सरकार द्वारा जारी नीति के अनुसार तुरन्त कार्यवाही की जावे। इस सम्बंध में बताया गया है कि राजस्थान उच्च न्यायालय की एसबी सिविल रिट पिटीशन सं. 2145/2010 एवं उच्चतम न्यायालय की विशेष अनुमति अपील (दीवानी) सं. 8519/2006 में अन्तरिम आदेश दिनांक 29-09-09 की पालना में उन्हें निर्देशित किया गया है, इसके बावजूद प्रकरण में कार्यवाही लम्बित रखी जा रही है। सांखला ने जिला कलेक्टर के पत्र क्रमांक- एफ.12()राजस्व/2010/3880-3888 दिनांक- 19-05-11, क्र. 11878-11897 दिनांक-01-12- 2010, क्र. 13754-13773 दिनांक- 30-12-2010, क्र. 2338-2357 दिनांक- 29-03-2011 एवं क्र. न्याय/2010/9616-46 दिनांक- 10-11-2010 व क्र. 09/6864 दिनांक-28-10-09 का अपने पत्र में हवाला दिया है, जिनकी स्थानीय अधिकारियों द्वारा कोई पालना नहीं की जा रही है।
सांखला ने मांग की है कि नेहरू पार्क परिसर, लाडनूं को अतिक्रमण से मुक्त करावें। आवंटित भूमि खसरा नं. 497 सरहद लाडनूं को जिला कलेक्टर नागौर द्वारा पत्र क्रं. राजस्व राजस्व/86/903 दिनांक- 03-03-1986 द्वारा 30 वर्षों की लीज पर निशुल्क आवंटित किया गया था, परन्तु इसमें लीज शर्तों व नियमों का उल्लंघन किया गया है। यहां निर्मित भवनों के लिए स्थानीय निकायों से निर्माण सम्बंधी आवश्यक स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई और न कृषि भूमि के रूपान्तरण की कार्यवाही ही की गई। सांखला ने इस सम्बंध में उपखण्ड अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक- सीएम/रीडर/08/42 दिनांक- 03-10-2008, क्र. सीएम/रीडर/08/1623 दिनांक- 04-11-2008, क्र. राज्यपाल सचिवालय/08/1781 व 1782 दिनांक- 16-10-2008 के सम्बंध में कार्यवाही नहीं की जाना बताते हुए तुरन्त कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने तहसीलदार कार्यालय से जारी पत्रांक- भू.अ./2011/11/768 दिनांक- 07-04-2011 मेंसंलग्र की गई अतिक्रमियों की सूची के अनुसार अतिक्रमणों को हटाने व समस्त अनधिकृत रूप से बने मकानों को सरकारी तहबील में लेने की मांग भी की है।
इस सम्बंध में अनावश्यक विलम्ब करने, सभा-संस्थाओं के प्रभाव में आकर कत्र्तव्यनिष्ठा में विफल रहने, अपूर्ण सूचनाओं को अग्रेषित करने, रिकार्ड व पत्रावलियों को बिना देखे ही सूचनाएं भिजवाई जाने को गम्भीर व लापरवाही मानते हुए उच्चाधिकारियों व न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने की चेतावनी भी दी है।

धड़ल्ले से हुआ बाल विवाह : धरी रह गई शिकायत

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। प्रथमदृष्टया नाबालिग एवं विवाह के अयोग्य साबित हो जाने के बावजूद पुलिस व प्रशासन ने केवल लाचारगी ही नहीं दर्शाई बल्कि बाल विवाह को सम्पन्न करवाने में सहायक की भूमिका भी निभाई। स्थानीय तेली रोड़ पर गली नं. 27 के रहवासी मोहम्मद सलाम सिलावट की पुत्री साबिया बानो की शादी 15 मई को बीदासर के मो. वहीद पुत्र हाजी मो. बल्खी के साथ तय की, जिसकी शिकायत मो. रफीक सौरगर ने पुख्ता सबूतों के साथ उपखण्ड मजिस्ट्रेट के समक्ष करके बताया कि साबिया बानो नाबालिग है व विवाह के लिए योग्य आयु प्राप्त नहीं है। शिकायतकर्ता रपुीक ने अपनी शिकायत के साथ साबिया का जन्मतिथि प्रमाण पत्र, जो नगर पालिका से जारी था, तथा भारत के विदेश विभाग व दूतावास सहिम मस्कत सरकार द्वारा भी प्रमाणित थे। साबिया के पासपोर्ट की प्रति भी पेश की, जिससे वो मस्कट की विदेश यात्रा कर चुकी तथा मस्कट की अदालत में भी ये सभी दस्तावेजात प्रस्तुत किए जा चुके।
धड़ल्ले से भरा गया मायरा
उपखण्ड अधिकारी के पास शिकायत पहुंचने और लड़की के पिता को पाबंद करने के बावजूद इस विवाह ाके आयोजकों को राजनैतिक व अन्य समर्थन मिला,तथा उन्होंने अपने लाडनूं के मायरदारों से सार्वजनिक तौर पर मायरा लिया तथा पुलिस व प्रशासन को बालविवाह हर हाल करने की चेतावनी दे डाली।
शिकायतकर्ता को धमकाया व दबाया
इस शिकायत पर हालांकि उपखण्ड अधिकारी ने पुलिस व तहसीलदार को पाबंद किया, परन्तु दूसरी तरफ राजनैतिक, आर्थिक और अन्य दृष्टियों से दबाव डालकर अपने वैवाहिक आयोजन को हर हाल करने पर उतारू सलाम ने अनेक लोगों का सहारा लिया और शिकायतकर्ता को बुरी तरह डराया-धमकाया और उसे शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर तक किया, लेकिन जो बालविवाह की जानकारी एक बार प्रशासन की जानकारी में आ गई, उसे वापस दबा पाना मुश्किल होता है, और प्रशासन दवाब में आने के बावजूद खानापूर्ति कर फाईल को बंद करना तो आवश्यक समझता ही है।
निकाला मेडिकल जांच का रास्ता
जिस पिता ने मस्कत देश में बेटी के मुकदमें में उसकी उम्र के लिए जिस जन्म प्रमाण पत्र और पासपोर्ट का सहारा लिया, उसी ने उसे पूरी तरह झुठलाते हुए अपनी पुत्री की वास्तविक आयु 16 साल की जगह 19 साल बताते हुए पुलिस व प्रशासन की सलाह पर मेडिकल जांच करवाने का प्रस्ताव रखा। मेडिकल जांच में चिकित्सक ने न तो किसी हड्डी रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित समझा और न स्त्री रोग विशेषज्ञ या डेझिटस्ट की सलाह ही ली, जो इस तरह के प्रकरण में मायने रखती है। आखिर यह तो मिलीभगत पूर्वक खानापूर्ति करने का मामला जो ठहरा, इसलिए आनन-फानन में मेडिकल प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया , ताकि बाल विवाह में कोई अड़चन न पैदा हो। जब प्रशासन व पुलिस सहायक बन जावे तो कौन बाधा पैदा करेगा। मेडिकल रिपोर्ट को देखा जावे तो वह पमरी तरह प्रायोजित की प्रतीत होती है, जिसमें लड़की की आयु का निर्धारण करने में सारी खानापूर्तियां मात्र ही की गई। अगर कोई निष्पक्ष मेडिकल बोर्ड बैठाकर यह जांच अब भी की जावे तो यह रिपोर्ट पूरी तरह झूठ निकल सकती है।
कौन जिम्मेदार है इस बाल विवाह का?
राज्य सरकार ने आदेश निकाल कर उपखण्ड कार्यालयों पर बाल विवाह नियन्त्रण केन्द्र स्थपित करवाए तथा बाल विवाह के लिए एसडीओ को जिम्मेदार ठहराने की घोषणा की, पर यहां सभी आदेशों की खुली धज्जियां उड़ी, और सब देखते रहे, आखिर कहा जाता है कि समरथ को नहीं दोष गुसांईं।
नियमानुसार जिस काजी ने इस बाल विवाह की निकाह पढाई, जिस हलवाई ने बारातियों या वैवाहिक भोज के लिए खाना बनाया और जितने लोग वर व वधु पक्ष के इस शादी में शामिल हुए , गवाह बने वे सभी बराबर के मुलजिम होने चाहिए, पर वो तो तब ना जब प्रशासन इसके लिए कार्रवाई करने की इच्छा रखे।
खड़े रह गए सवाल
बाल विवाह तो सम्पन्न हो गया, परन्तु अनेक सवाल खड़े रह गए। इस मामले में पूरी जांच करने में प्रशासन ने पूरी कोताही बरती है।
-क्या जिस जन्म प्रमाण पत्र को उपखण्ड अधिकारी के समक्ष शपथ पत्र देकर बनवाया गया तथा उसके लिए एसडीओ की अनुज्ञा ली गई हो, वो झूठा हो सकता है?
- अगर वो झूठा है तो लड़की के परिजनों के विरूद्ध झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत करने का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
- पासपोर्ट को लड़की अवयस्कता में उसके अभिभावक ने बनवाया, उसके समर्थन में शपथ पत्र प्रस्तुत किए, क्या वो झूठे है? अगर गलत हैं तो उनके लिए मुकदमा क्यों नहीं चलाया जावे?
-मस्कत की अदालत में जिन दस्तावेजों का उसके पिता ने उम्र को साबित करने के लिए किया, क्या वो भी झूठे साबित किए जा सकते हैं?
- क्या पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्यों को नकार कर केवल अन्दाजन आयु का अनुमान बताने वाले डाक्टर के प्रमाण पत्र को सही माना जाना जायज कहा जा सकता है?
और भी अनेक सवाल हैं, पर जहां कानून को ताक पर रख दिया जावे तो वहां ये बातें नक्कारखाने में तूती की आवाज है।

डेगाना तक हो रानीखेत एक्सप्रेस

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। सजग नागरिक मोर्चा ने रानीखेत से रतनगढ तक चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन को बढाकर डेगाना तक करने की मांग की है। मोर्चा के अध्यक्ष जगदीश यायावर ने रेलमंत्री सहित महाप्रबंधक उत्तर रेलवे, चैयरमेन रेलवे बोर्ड, महाप्रबंधक उत्तर पश्चिम रेलवे एवं सभी सम्बंधित रेलवे अधिकारियों व सांसदों को पत्र लिखकर बताया है कि यह गाड़ी रतनगढ सुबह 11 बजे आती है और शाम 4 बजे वापस रानीखेत के लिए रवाना होती है। इस बीच के 5 घंटों के समय को डेगाना तक गाड़ी को बढाकर उपयोग में लिया जा सकता है। इससे इस क्षेत्र के लोगों, प्रवासियों, व्यापारियों और अन्य लोगों को भी लाभ मिल सकेगा तथा दिल्ली तक सीधा साधन उपलब्ध हो जाएगा। पत्र में बताया गया है कि सुजानगढ, लाडनूं, डीडवाना आदि से बड़ी तादाद में लोग दिल्ली, आसाम, बंगाल आदि विभिन्न क्षेत्रों में रहते हैं। रानीखेत एक्सप्रेस को डेगाना तक बढाए जाने से उन सबको इस ट्रेन से आवागमन का साधन उपलब्ध होने के साथ ही रेलवे को भारी राजस्व स्रोत मिलेगा।

शुक्रवार, 13 मई 2011

सेन समाज ने किया एकता का प्रदर्शन-- सामूहिक रूप से मनाई सेन जयंती: शोभायात्रा निकाली

लाडनूं (जीतमल टाक)। स्थानीय सेन समाज द्वारा पहली बार सेन जयन्ती के अवसर पर पूर्वी तरफ बसे और पश्चिमी तरफ बसे दोनों की तरफ से सामूहिक रूप से विशाल आयोजन किया गया। इस अवसर पर हालांकि सेन बगीची व सेन मंदिर दोनों में अलग-अलग हवन व पूजा-पाठ का आयोजन किया गया, लेकिन सेन मंदिर से सेन बगीची तक शहर के विभिन्न मार्गों से निकाली गई शोभायात्रा ने समूचे शहर को सेन समाज की एकता का परिचय दिया। इस अवसर पर भक्त शिरोमणि सेन महाराज की विशाल फोटो के साथ विभिन्न झांकियों, मोटर साईकिल रैली, नगाड़ा-निशान व बैंड-बाजों के साथ समाज के बड़ी संख्या में महिला-पुरूषों ने गाते व नारे लगाते शरीक होकर यात्रा की शोभा बढाई। सेन मंदिर में यज्ञ में यजमान के रूप में लालचंद सेन बैठे व सेन बगीची में हुए यज्ञ में भंवरलाल निर्वाण, राजकुमार निर्वाण, विजयकुमार टोकसिया, सुमेरमल मोयल व सज्जन कुमार मोयल यजमान बने। सभी आयोजनों में सेन मंदिर के मंत्री कुन्दनमल टाक, मांगीलाल सोनगरा, अमरचंद टाक, जीतमल टाक, नथमल फूलभाटी, बद्रीलाल फूलभाटी, केशरीचंद टाक, गिरधारीलाल सेन, पोकरमल निर्वाण, ललित वर्मा, लूणकरण फूलभाटी, रामेश्वर सेन, गणेशमल सोनगरा, जगदीश सेन आदि प्रमुख लोगों ने आगे आकर सफल बनाया। इस दिन सभी सेन समाज के लोगों ने अपनी अपनी दुकानें व प्रतिष्ठान बंद रखकर सेन जयंती में एकता की भावना को बल दिया।

शहर मंडल में प्रवीण जोशी व ताजू खां बने महामंत्री

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। भारतीय जनता पार्टी की शहर मंडल अध्यक्ष मुरलीधर सोनी ने भी प्रतीक्षित अपनी टीम की घोषणा कर दी है। शहर मंडल की कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद पर श्रीमती निर्मला जांगिड़, पूनमचंद टाक, सुखदेव सिंह, लादूराम गुर्जर, श्रीमती गायत्री देवी शर्मा व अली अकबर रिजवी को मनोनीत किया गया है। महामंत्री के रूप में प्रवीण कुमार जोशी व ताजू खां मोयल को नियुक्ति दी गई है। मंत्री पद पर रूगाराम मौर्य, नानूराम चिंडालिया, भंवरू खां टाक, श्रीमती परमेश्वरी देवी राठी, श्रीमती सुशीला दूगड़ व श्रीमती दर्शन देवी सेन को लिया गया है। कोषाध्यक्ष फूलचंद जालान को बनाया गया है। कार्यकारिणी में अंतरंग सदस्यों के रूप में कु. एलिजा पीपावत, श्रीमती सुमित्रा आर्य, श्रीमती जुबेदा खान, श्रीमती किस्तूरी देवी सोनी, श्रीमती मुजू देवी जालान, श्रीमती शकुन्तला पांडय़ा, श्रीमती मुन्नी देवी चौहान, श्रीमती हौलासी देवी जांगिड़, श्रीमती संतोष देवी ढोली, श्रीमती वन्दना जांगिड़, श्रीमती दिलभर माथुर, श्रीमती रमाकान्ता शर्मा, श्रीमती मंजूदेवी सोनी, श्रीमती रूकमणी देवी पारीक, भीकमचंद बैद, द्वारका प्रसाद शर्मा, नारायणसिंह चौहान, महेन्द्रकुमार अग्रवाल, दानाराम जांगिड़, मोहनलाल वर्मा, मनीर खां, भैराराम माली, ओमप्रकाश सोनी, गंगाराम रेगर, शौकतअली सिलावट, ललित कुमार वर्मा, गुलाबचंद चौहान, फतूखां मलवाण, नन्दकिशोर वर्मा, जगदीश प्रसाद दौलावत, सुभाष टेलर, मदनगोपाल शर्मा, गोविन्दसिंह जोधा, जगदीश प्रसाद माहेश्वरी, ओमप्रकाश प्रजापत, रामेश्वरलाल सांखला, अनवर सोरगर, मईनुदीन पडि़हार, सुरेश कुमार जडिय़ा, प्रेमप्रकाश प्रजापत, बजरंगलाल पारीक, ताराचंद वर्मा, दीन मोहम्मद सोलंकी व लालचंद सोनी को शामिल किया गया है।
कार्यकारिणी में अन्य आमंत्रित सदस्यों के रूप में पूर्व विधायक मनोहरसिंह, पूर्वअध्यक्ष गोविन्दचंद माथुर, उमेश पीपावत, श्रीचंद पारीक व हनुमानमल जांगिड़, पालिकाध्यक्ष बच्छराज नाहटा, उपाध्यक्ष याकूब शेख, पूर्व पालिकाध्यक्ष गुलाबरानी भोजक स्थाई आमंत्रित सदस्य व पार्षद छत्तरसिंह, अदरीश खां, बीरबल स्वामी, हनुमानमल जोशी, भंवरलाल प्रजापत, दीपक चौरडिय़ा, कल्याण सिंह चौहान, फैजूखां, नेमाराम भानावत, बिदाम व्यौपारी व श्रीमती आचूकी बानो को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में रखा गया है।

भाजपा की कार्यकारिणी घोषित-- तनसुख शर्मा व लादूसिंह बने ग्रामीण मंडल के महामंत्री

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। लम्बे समय से प्रतीक्षित भारतीय जनता पार्टी की ग्रामीण व शहर मंडल की कार्य कारिणियां जिलाध्यक्ष हरीश कुमावत के निर्देशानुसार घोषित कर दी गई है। ग्रामीण मंडल अध्यक्ष नाथूराम कालेरा की कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष के रूप में इन्द्रसिंह रावणा राजपूत, राजकंवर राठौड़, डालूराम मेघवाल, रामप्यारी गूजर, भंवरलाल सैनी व नीलिमा गौड़ को उपाध्यक्ष के रूप में शामिल किया गया है। महामंत्री पद तनसुख शर्मा जैसलाण व लादूसिंह राठौड़ धूडि़ला को दिया गया है। मंत्री के रूप में रामूराम मेघवाल, प्रेमदास स्वामी, भवानीसिंह राठौड़, उच्छब कंवर, सुप्यार कंवर व हनीफ टाईगर को लिया गया है। कोषाध्यक्ष पद का दायित्व हनुमान प्रसाद शर्मा ध्यावा को सौम्पा गया है। कार्यकारिणी में अंतरंग सदस्यों के रूप में पूर्णसिंह राठौड़ खानपुर, पन्नालाल गुर्जर जसवंतगढ,संग्रामसिंह राठौड़ डाबड़ी, रवीन्द्रसिंह राठौड़ कसुम्बी अलीपुर, किरण प्रजापत धोलिया, शिवभगवान पुरोहित लैड़ी, रिछपालसिंह राठौड़ अनेसरिया, रिछपाल शर्मा सारड़ी, खंगाराम चौधरी खींवज, सत्यनारायण शर्मा मीठड़ी, श्रवण धाभाई फिरवासी, सुन्दर देवी प्रजापत रींगण, शिवनारायण घोटिया बाकलिया, मोहनराम बीजारणिया तंवरा, संतोष शर्मा जैसलाण, कीर्ति कंवर राठौड़ हुसैनपुरा, सोहनराम गिंवारिया घिरड़ौदा मीठा, कायम सिंह राठौड़ छपारा, मुकेश जांगिड़ बालसमंद, अमर सिंह सोढा बालसमंद, अर्जुनसिंह शेखावत बाकलिया, नारायणी देवी मेघवाल बाकलिया, उम्मेदसिंह शेखावत मीठड़ी, फेफी मेघवाल सारड़ी, रतनी देवी मेघवाल रोजा, फातमा तेली निम्बी जोधां, कानाराम प्रजापत कसूम्बी, रामेश्वर लाल प्रजापत ध्यावा, ललिता स्वामी छपारा, जुवाना राम प्रजापत बल्दू, प्रताप सिंह राठौड़ कोयल, हेमाराम नायक रताऊ, रामनारायण चोयल सींवा, आसी देवी भाकर सिलनवाद, कालूराम गूजर रोजा, कविता कंवर राठौड़ हुडास, तुलसी देवी गूजर देवरा, हीर सिंह राठौड़ मणूं, प्रभुराम भारी चन्द्राई, किरण देवी सोनी निम्बी जोधां, जुगल किशोर अग्रवाल घिरड़ौदा मीठा, छोटुराम हरिजन निम्बी जोधां व रामकरण शर्मा सिकराली को सम्मिलित किया गया है।
इसके अलावा विशेष आमंत्रित सदस्यों में पूर्व विधायक मनोहरसिंह, पूर्व प्रधान श्रीमती इंद्रमणि दायमा, पूर्व उपप्रधान बजरंगसिंह लाछड़ी, पूर्व अध्यक्ष बजरंगलाल दायमा, प्रेमाराम बीडासरिया, हनुमानाराम कालुराम गेनाणा, श्रीमती ममता बागड़ा, चैनसिंह ओड़ींट, पदमसिंह रोड़ु, ओमप्रकाश बागड़ा, राजेन्द्रसिंह धोलिया, गोविन्दसिंह कसूम्बी, अंजनी सारस्वत, भागीरथ पारीक आदि को शामिल किया गया है।

तीसरी बार बने गोदारा अध्यक्ष व घींटाला कार्यालय मंत्री- शिक्षक संघ शेखावत के चुनाव

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। लाडनूं ब्लॉक के सबसे बड़े 700 क्रियाशील सदस्यों वाले शिक्षक संघ शेखावत के चुनाव पर्यवेक्षक नथूराम ईनाणियां व कैलाश कांकड़ की देखरेख में निर्विरोध सम्पन्न हुए। इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष लालाराम बिडिय़ासर भी मौजूद थे। पंचायत समिति सभागार में आयोजित इस बैठक में संरक्षक हरनाथ पूनियां ने कार्यकारिणी की घोषणा की, जिसे सर्वसम्मति से निर्णित करके घोषित किया गया। इसके अनुसार सह संरक्षक घीसाराम चौधरी, अध्यक्ष नानूराम गोदारा गैनाणा, महामंत्री चन्द्राराम मेहरा फिरवासी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सोहन सारण, कोषाध्यक्ष हनुमानराम बुरड़क तिलोटी, सभाध्यक्ष पन्नालाल टाक मंगलपुरा, सह सभाध्यक्ष विजय प्रजापत, उपाध्यक्ष रामप्रताप स्वामी बिठुड़ा, बसंत माली, नसरूद्दीन भाटी, इन्द्र जांगिड़ लाडनूं, रामनिवास, रामावतार, रामनिवास पुरी, विधिमंत्री रामप्रसाद जाखड़ व कार्यालय मंत्री जगदीश प्रसाद घींटाला कसूम्बी जाखला को उबनाया गया है। प्रेरक प्रतिनिधि श्याम पंवार व महिला प्रेरक मंत्री मुजू महला लाछड़ी को नियुक्त किया गया है।
प्रवक्ता नाथूसिंह शेखावत ने बताया कि गोपाल साख बेड़, मदन झूरिया, बालूराम डूडी, भागीरथ पचार, प्रतिभा शर्मा, हनुमानसिंह राजावत, सहदेव मंडा, श्रीराम पावडिय़ा, पदमाराम डोडवानिया, प्रवीण शर्मा, उम्मेदसिंह, राजू बिडिय़ासर, मुस्ताकखां मीठड़ी, भागीरथ मंडा, दीनदयाल ठोलिया मिंडासरी, दलिप सींवा, कालू भूरावत व शहरी उपाध्यक्ष महेन्द्रसिंह राठौड़ सहित दो दर्जन शिक्षकों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।